मिजोरम में प्रमाणित कार्बनिक (जैव) फलों की खेती और प्रसंस्करण कार्यक्रम

विवरण

मिजोरम में जैव (कार्बनिक) खेती के लिए अपनाए जाने वाले भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान और सिंचाई की उपयुक्त तकनालाजी की पेशकश तथा प्रीमियम बाजारों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए प्रसंस्करण केंद्रों की स्थापना।

इस परियोजना से मिजोरम  में भरपूर मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का स्थानीय समुदाय की बेहतरी के लिए उपयोग संभव होगा।  

उद्देश्य

  • सुरक्षित व उच्च गुणवत्ता वाले फल व सब्जियों की खेती और मिट्टी की उर्वर्ता बढ़ाने के लिए खेती की स्थायी जैव प्रणाली का विकास करें
  • जैव खेती के लिए भूमि का प्रमाणन
  • जैव खेती के वैज्ञानिक तरीके अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करना
  • किसानों की क्षमता बनाना ताकि खेती की लागत कम हो और उत्पादकता बढ़े
  • खेतों में तैयार होने वाले संसाधनों जैसे पोषण में समृद्ध खेत में यार्ड खाद बनाना, वर्मी कंपोस्ट, वर्मी वाश आदि का संरक्षण 
  • प्रसंस्करण टेकनालॉजी का प्रदर्शन
  • उत्पाद का जैव प्रमाणन
  • कृषि उत्पादों को विपणन सुविधा

 

अपेक्षित परिणाम

यह कार्यक्रम स्थानीय किसानों और उद्यमियों के बीच अपनी कृषि क्रियाकलापों की प्रभावी सहायता के लिए नए प्रौद्योगिकीय विकास का उपयोग और उन्हें लागू करने के लिए लिए जागरूकता फैलाएगा और भिन्न क्षेत्रों में फलों की संरक्षित खेती को बढ़ावा देगा। किसानों और स्थानीय लोगों को फलों व सब्जियों के प्रबंध की जानकारी मिलेगी और साथ ही इससे रोजगार के मौकों तथा स्थनीय किसानों की आय में वृद्धि होगी।

खेती के आधुनिक व्यवहारों के उपयोग का नतीजा यह होगा कि पैदावार अच्छी होगी, उच्च गुणवत्ता वाले फल बिना मौसम के होंगे, पौधों और बीजों का स्वस्थ व द्रुत विकास होगा तथा समय व श्रम की बचत होगी। जैव उर्वरक और अन्य कार्बनिक खाद के उपयोग से पहाड़ों की पारिस्थितिकी की रक्षा होगी। इस तरह, प्रस्तावित परियोजना इलाके के संपूर्ण सामाजिक आर्थिक विकास में योगदान करेगा।