Value Addition to Technology

तकनीकी-व्यावसायिक सहायता

एनआरडीसी का मुख्य कार्य "इनोवेशन श्रृंखला" में रही कमी को पूरा करने के लिए ऐसी आवश्यक तकनीकी और आर्थिक सहायता करना है जिसके द्वारा श्रेष्ठ आविष्कार या प्रक्रियाएं उद्योगों द्वारा तत्काल अपनाए जाने के लिए रूपांतरित और विकसित की जा सके।

उद्योगों द्वारा स्वीकार्य होने के लिए प्रयोगशाला मापदंड वाली प्रोद्योगिकियों की उपयोगिताओं को बढ़ाना आवश्यक होता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे-छोटे विषयों जैसे उत्पाद का परीक्षण, मैदानी परिस्थितियों में परिणामों की वैधता की पुष्टि करना, आदिप्ररूप में सुधार करना और विस्तृत जानकारी दस्तावेज तैयार करने जैसी समस्याओं को, दूर करने में आवेदकों की अपेक्षित सहायता प्रदान करना है।

इसयोजनाकेअंतर्गतएनआरडीसीभारतीयआविष्कारकर्ताओं/वैज्ञानिकों/तकनीकीविद्वानों/ एनआरडीसीकेपुरस्कारविजेताओं/एनआरडीसीअनुज्ञप्तिधारकोंआदिकोउनकेद्वाराविकसितप्रोद्योगिकीकोउद्यमियोंऔरउद्योगोंद्वारावाणिज्यिकऔरस्वीकार्यबनानेकेलिएतकनीकीऔरव्यावसायिकसहायताप्रदानकरताहै।तकनीकीवव्यावसायिकसहायतानिम्नलिखितउद्देश्योंकेलिएप्रदानकीजातीहै:-

क्र सं.तकनीकी-व्यावसायिक सहायता का प्रकारसहायता की अधिकतम राशि (रू.)
1.

व्यावसायिक रूप से स्वीकार्य बनाने के लिए आदिप्ररूप में सुधार करना

2,00,000
2.

प्रक्रिया परीक्षण/फ़ील्ड परीक्षण/जांच विशलेषण/ करना

2,00,000
3.

आविष्कार/इनोवेशन (आवंटित की जाने वाली या आवंटित की गई प्रोद्योगिकी के मामले में कार्यरत स्थिति की फ़िल्म या एनिमेशन बनाना

25,000
4.

पूर्व व्यवहार्यता रिपोर्ट (व्यावसायिककरण के लिए एनआरडीसी को सौंपी गई तकनीकी जानकारी के लिए) बनाना

25,000
5.

विस्तृत जानकारी दस्तावेज (व्यावसायिककरण के लिए एनआरडीसी को सौंपी गई तकनीकी जानकारी के लिए) बनाना

25,000
6.

प्रोद्योगिकी का प्रदर्शन (कच्चा माल, रासायनिक पदार्थ और जैव रसायनों को खरीदने के लिए) (व्यावसायिककरण के लिए एनआरडीसी को सौंपी गई तकनीकी जानकारी के लिए)

25,000

 

प्राथमिक परियोजना

आगे के विकास कार्य – कॉरपोरेशन अपनी योजना इस योजना "विकास परियोजनाएं और प्राथमिका वाली परियोजनाओं का मूल्यवर्धन" के तहत आगे के विकास कार्यों का समर्थन करता है और चुनी हुई एनआरडीसी आवंटित प्रौद्योगिकी के लिए मूल्यवर्धन का काम करता है और इसके लिए अनुसंधान व विकास संस्थाओं / शिक्षा संस्थान / लाईसेंसी / आविष्कारक (कों) को वित्तीय सहायता देता है ताकि व्यावसायिक उत्पादन और उत्पाद का विपणन सफल हो।

अपस्केलिंग, पायलट प्लांट स्केल अध्ययन, उत्पाद की संपुष्टि, भिन्न नियामक प्राधिकरणों के तहत उत्पाद का पंजीकरण, कार्यक्षेत्र में कार्यकुशलता से संबंधित आंकड़े जुटाने के लिए परीक्षण करना, औद्योगिक अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए औद्योगिक अनुसंधान से प्राप्त जानकारी के आधार पर टॉक्सीकोलॉजिकल आंकड़े एकत्र करना ताकि उन्हें व्यावसायिक निर्माण के स्तर पर लाया जा सके – तकरीबन सभी प्रौद्योगिकीयों के लिए एक महत्त्वपूर्ण इनपुट है।  

एनआरडीसी को अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) संस्थाओं, शिक्षा संस्थाओं और स्वयं आविष्कारकों द्वारा कई प्रौद्योगिकी आवंटित की जा रही हैं ताकि उद्योग द्वारा इनका व्यापारीकरण कराया जा सके। इन प्रौद्योगिकीयों में से कई प्रयोगशाला स्तर / बेंच स्केल / आदिप्ररूप स्तर पर ही हैं और विकास के इस स्तर तथा औद्योगिक आवश्यकता के बीच के अंतर को बाटने के लिए इनमें भिन्न स्तर पर मूल्यवर्धन की आवश्यकता हो सकती है।

बेसिक (बुनियादी) इंजीनियरिंग डिजाइन पैकेज

प्रक्रिया को प्रयोगशाला स्तर से पायलट या व्यावसायिक स्तर तक ले जाने के लिए बुनियादी इंजीनियरिंग के काम किए जाते है। बीईडीपी का विकास करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण की आवश्यकता होती है ताकि अंतिम प्रक्रिया तैयार की जा सके। इसे प्रयोगशाला में किए जाने वाले प्रयोगों की श्रृंखला के बाद हासिल किया जाता है और फिर आवश्यक इंजीनियरिंग इनपुट को शामिल किया जाता है ताकि प्रक्रिया काम करने योग्य हो। एख बार बीईडीपी तैयार हो जाए तो विस्तृत इंजीनियरिंग की जाती है और व्यावसायिक प्लांट स्थापित किया जाता है।