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Dr Rajendra Dobhal

Dr. Rajendra Dobhal, Chairman & Managing Director (CMD) of National Research Development Corporation, New Delhi under the DSIR, a premier organization for development, promotion and transfer of technologies emanating from various national R& D institutions, is a Ph.D. in Environmental Sciences, published over 110 papers, edited 10 books and over 15 technical reports. He is also Secretary, National Academy of Sciences, India, (Uttarakhand Chapter) and a member of the Academy. He is also a Fellow of Academy of Forest and Environmental Sciences.

Dr. Dobhal is a known Intellectual Property Professional trained at International Law Development Institute (ILDI) faculty and CASRIP, Washington University, USA and an executive member of Intellectual Property Professionals Association. He is credited to establish Intellectual Property Facilitation Centre, Patent Information Centre and Technopreneur Promotion Outreach Centre in Uttarakhand.

Dr. Dobhal is currently engaged in one of the flagship Vigyan Dham project. He is monitoring over 225 R&D projects and instrumental in creating Chapter on Green Chemistry, Centre for Advance Study in Mathematics and Centre for Climate Change Studies in Uttarakhand. His other focus areas are Cross-flow technology, River Bank Filtration, Solar thermal and isotope technology for source identification in energy and water sectors in the state.

Dr. Dobhal has also served as, Director Uttarakhand Space Application Centre and Sr. Scientific Advisor and Project Director, Biotechnology, Uttarakhand. 

Dr. Dobhal is a member of various professional bodies and has been given award of Excellence by the Royal Australian Chemical Institute and International Commonwealth Youth Silver Award 2008 by Commonwealth Youth Programme Asia Centre for Environmental Conservation. Uttarakhand Ratna and Uttarakhand Gaurav were also bestowed upon him in the year 2010 and 2012 respectively. Dr. Dobhal is also a fellow of Academy of Forest and Environmental Sciences


New technologies; encourage profitability in all activities; access technologies from their source, trade them with corporate world and take them to global market.

Creating an enabling environment for the Indian innovations to fruition; provide world class facilities and services to the Indian R&D organizations and industry for exploiting innovations.

Sh. B.N.Sarkar

Shri B.N. Sarkar is a Post Graduate Engineer in Computer Controlled Power System and Drives from Indian Institute of Science (IISc), Bangalore and holds a Graduate Degree in Electrical Engineering from Regional Engineering College (Recently known as National Institute of Technology), Durgapur. Prior to joining the Government of India in 1990, he worked in M/s Uptron Powertronics Limited, Sahibabad for three years as a R&D Engineer where he had designed a number of uninterrupted power supply of various capacity from 5 KVA to 50 KVA for Defence application and Battery Charger for Telephone Exchange. He joined in the section – National Information System for Science and Technology (NISSAT) of Department of Scientific and Industrial Research (DSIR), Ministry of Science and Technology as Scientific Officer – II in 1990 and continued his service here for over 15 years. He promoted Automation of Information Centre in India through UNESCO software. In the process, he assisted to do many National and International projects and visited France, China, Thailand, Sri Lanka, Taiwan, Singapore, Hong-Kong.   He is presently Scientist – ‘F’ in the same Department of Scientific and Industrial Research and is engaged in promotion of industrial research, technology development and transfer. During this period, he has been involved in formulation of schemes aimed at promoting industrial R&D expenditure, technology development and demonstration of innovative products and processes with a view to improve country’s industrial competitiveness. He has been particularly engaged in promoting innovative technology and has been instrumental in sensitizing Indian industries and R&D institutions towards increasing the technology content in the products and services offered by them and enhancing country’s technology intensive exports. In addition to that he is holding Administrative In-charge of two PSEs of this Department namely Central Electronics Limited (CEL), Sahibabad and National Research Development Corporation (NRDC), New Delhi.

Sh. Sanjay Bhatia

Mr. Sanjay Bhatia, B.Com(H) LLB, has 37 years experience in metal packaging industry, currently he is Managing Director of Hindustan Tin Works Ltd. and Chairman, Rexam-HTW Beverage Can India Ltd.(Leading manufacturers of tin containers for food, beverages and non-food in India)

Throughout his career Mr. Bhatia has been associated with leading Chambers of Commerce and has represented the industry on various committees set up by Central & State Governments from time to time, including kelkar task force on simplification of Indirect Taxes in India.

He is presently the President of All India Organisation of Employers (AIOE)

  • President, FICCI Confederation of MSME
  • Chairman, Manufacturing Committee & MSME Committee, Federation of Indian Chamber of commerce & Industry (FICCI)
  • Steering & Managing Committee member of FICCI)]
  • Vice President-All India Organisation of Employers(AIOE)
  • Part Time Director on the Board of National Research Development Corporation
  • Member-Standing Committee for monitoring the credit flow to the MSME sector(Govt. of India) and suggesting policy measures.
  • President of Metal Container Manufacturers Association (MCMA)
  • Vice-President of Indian Council of Arbitration(ICA)
  • Past Chairman of the Indian Institute of Packaging(IPP)
  • Past President of the PHD Chamber of Commerce and Industry(PHDCCI)
  • Managing Committee member Associated Chamber of Commerce(ASSOCHAM)
  • Member of International Packaging Association based in Germany(IPA)

एनआरडीसी के विषय में

नेशनल रिसर्च डिवलपमेंट कॉरपोरेशन(एनआरडीसी) की स्थापना 1953 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) संस्थाओं / विश्वविद्यालयों में खोजी जाने वाली प्रौद्योगिकियों, विधियों, आविष्कारों, पेटेंटों, प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना, विकास करना और उन्हें व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध कराना था। वर्तमान में यह विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में काम कर रही है। अपने अस्तित्व के छह दशकों और अपने कॉरपोरेट लक्ष्यों के अनुपालन के दौरान एनआरडीसी ने भारत में और विदेशों में भी वैज्ञानिक और औद्योगिक समुदायों के साथ मजबूत संबंध बनाए हैं तथा अनुसंधान संस्थाओं, शिक्षा और उद्योग के विस्तृत नेटवर्क का विकास किया है तथा उनके साथ उनकी प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकी जानकारियों के व्यापारीकरण के लिए औपचारिक व्यवस्था की है और अब इसे प्रौद्योगिकी के विस्तृत क्षेत्र के बड़े भंडार के रूप में जाना जाता है। प्रौद्योगिकी के इस क्षेत्र का विस्तार उद्योग के लगभग सभी क्षेत्रों में है जैसे कृषि और कृषि संसाधन, कीटनाशक समेत रसायन, दवाइयां और फार्मास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी, धातु विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रूमेंटेशन, निर्माण सामग्री, यांत्रिकी, इलेक्ट्रीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स आदि। इसने 4800 से ज्यादा उद्यमियों को स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के लाइसेंस दिए हैं और बड़ी संख्या में छोटे व मध्यम आकार के उद्योगों की स्थापना करने में सहायता प्रदान की है।

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में पथप्रदर्शक होने के साथ-साथ एनआरडीसी अपने संचरित प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत कई तरह के क्रियाकलाप करता है। यह अनुसंधान के प्रोत्साहन और प्रगति, आविष्कारों और नवाचारों के प्रोत्साहन के लिए होता है। इसमें सराहनीय आविष्कार पुरस्कार, तकनीकी व व्यापारिक सहायता, बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता तथा प्रौद्योगिकी के और अधिक विकास के लिए मूल्यवर्धन सेवाएं आदि शामिल हैं।

एनआरडीसी ने प्रौद्योगिकी और सेवाओं का विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों को सफलतापूर्वक निर्यात भी किया है। एनआरडीसी विकासशील देशों के लिए प्रौद्योगिकी, विश्वसनीय मशीनों और सेवाओं के स्रोत के रूप में विशेष रूप से मान्यता प्राप्त है।

कार्यक्रम और बजट आवंटन

1. आविष्कारकों और नवाचारकों को प्रेरित करने के लिए कार्यक्रम (प्रोग्राम फॉर इंसपायरिंग इनवेंटर्स एंड एनोवेटर्स – पीआईआईआई) धन का आवंटन बीई 2014-15 के अनुसार : 500.00 लाख रुपए

  • नवाचारों और आविष्कारों का प्रचार प्रसार
  • ओपन सोर्स प्रौद्योगिकी और सराहनीय आविष्कारों के लिए पुरस्कार
  • ‘इनोवेट इंडिया’ सम्मेलन
  • बौद्धिक संपदा और नवाचार सरलीकरण
  • बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी सरलीकरण केंद्र (बौद्धिक संपदा एफसी)
  • एनआरडीसी – विश्वविद्यालय सरलीकरण नवाचार केंद्र
  • पेटेंट सहायता
  • पेटेंट संगोष्ठी
  • पेटेंट खोज
  • अन्य बौद्धिक संपदा अधिकार गतिविधियां
  • सर्टिफिकेट प्रोग्राम के लिए ऑनलाइन बौद्धिक संपदा अधिकार एवं ज्ञान प्रबंधन कोर्सवेयर
  • प्रौद्योगिकी जानकारी प्रबंधन कार्यक्रम
  • वैज्ञानिकों, नवाचारकों और छात्रों को प्रक्रिया परीक्षण और प्रौद्योगिकियों की संपुष्टि के लिए तकनीकी व व्यापारिक समर्थन
  • नवाचारों / प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए ज्ञान प्रबंधन कार्यक्रम

 2. व्यापारीकरण के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी के विकास के लिए कार्यक्रम (प्रोग्राम फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेक्नालॉजी इंस्पायरिंग फॉर कमर्शियलाइजेशन – पीडीटीसी) बीई 2014-15 के अनुसार धन का आवंटन : 450.00 लाख रुपए

  • नवाचारों के व्यापारीकरण के लिए डिजिटल ज्ञान आधार (इनोवेशन पोर्टल)
  • डिजिटल पोर्टल
  • सदस्यता और शुल्क
  • प्रौद्योगिकी मूल्य वर्धन
  • बेसिक इंजीनियरिंग डिजाइन पैकेज
  • निर्धारित प्रौद्योगिकियों का बाजार सर्वेक्षण
  • विकास परियोजनाएं और प्राथमिक परियोजना के लिए मूल्यवर्धन
  • ग्रामीण और उत्तर पूर्व क्षेत्र में नवाचारों को प्रोत्साहन
  • नवाचारी उपयुक्त प्रौद्योगिकी के द्वारा पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता विकास कार्यक्रम
  • उपयुक्त नवाचारी प्रौद्योगिकी के द्वारा फलों और सब्जियों (को ज्यादा समय तक रहने योग्य बनाना) की शेल्फ लाइफ बढ़ाना
  • मिजोरम में प्रमाणित ऑर्गेनिक फलों की खेती और प्रसंस्करण का कार्यक्रम (एमएफसीपी सर्टिफायड प्रोग्राम)
  • देश में और विदेशों में भी प्रौद्योगिकी के व्यापारीकरण को बढ़ावा देना – सूचनाओं का प्रसार सूचनाओं का प्रसार निम्नलिखित के द्वारा :-
    • अनुसंधान और विकास – उद्यमियों की बैठक, सम्मेलन, संगोष्ठी, कार्यशाला  
    • प्रदर्शनी
    • विदेश में प्रदर्शनी
    • प्रकाशन

नवाचार सरलीकरण केंद्र (इनोवेशन फैसिलिटेशन सेंटर)

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बौद्धिक संपदा प्रबंधन में अपने गहन अनुभव के साथ एनआरडीसी विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), देश भर में स्वायत संस्थाओं और शिक्षा संस्थाओं में नवाचार सरलीकरण केंद्रके विकास की आवश्यकता और उसे पूरा करने की पेशकश करती है। यहां नवाचार क्रियाकलापों को बढ़ावा दिया जाएगा और फैकल्टी, छात्रों तथा अनुसंधानकर्ताओं के बीच इसे प्रोत्साहित किया जाएगा तथा बौद्धिक संपदा के प्रभावी प्रबंध का सरलीकरण किया जाएगा, देश में और विदेशों में निर्माण करने वाले उपक्रमों के साथ एसोसिएशन का विकास किया जाएगा तथा आगे चलकर उद्योग और उद्यमियों को बौद्धिक संपदा का हस्तांतरण किया जाएगा।

 एनआरडीसी विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान  (आईआईटी), भारत में स्वायत्त संस्थान और शिक्षा संस्थान के साथ मिलकर उनके परिसर में नवाचार सरलीकरण केंद्र(एनआरडीसी-आईएफसी) की स्थापना करेगी। स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय उद्योगों, विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), स्वायत्त संस्थान और भारत के शिक्षा संस्थाओं की फैकल्टी, छात्रों और अनुसंधानकर्ताओं के साथ कॉरपोरेशन के संबंध उनके नवाचारी अनुसंधान कार्य को विपणन करनें में मदद करेगा और सभी के लिए व्यावसायिक सफलता के लाभ उठाना संभव करेगा।

 मुख्य उद्देश्य

 •   क्षेत्र के मेजबान उद्योग की अनुसंधान और विकास क्षमताओं का उपयोग करते हुए क्षेत्र विशेष की प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना।

•   क्षेत्र की संस्थाओं के आरएंडडी से व्यावसायिक उत्पादों के लिए बौद्धिक संपदा प्रबंधन और प्रौद्योगिकी के व्यापारीकरण के रूप में मूल्यवर्धित सेवाएं उपलब्ध कराना।

•   बौद्धिक संपदा सुरक्षित प्रौद्योगिकी के सक्षम स्रोत के रूप में काम करना ताकि देश के निर्माण क्षेत्र को नवाचार सरलीकरण केंद्र के माध्यम से उपलब्ध नवाचारी प्रौद्योगिकियों पर आधारित नए उत्पादों और सेवाओं के विकास में सहायता दी जा सके। 

•   भारत में विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान  (आईआईटी), स्वायत्त संस्थान और शिक्षा संस्थानों में उपयुक्त माहौल संभव और तैयार करना ताकि नवीनता की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा सके और प्रशिक्षण व सहायता मुहैया कराई जा सके।  

•   भारत में एनआरडीसी –आईएफसी के द्वारा विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), स्वायत्त संस्थान और शिक्षा संस्थानों में उद्यमिता के क्रियाकलापों को प्रेरित करने के लिए सहायक की भूमिका निभाना। 

•   बौद्धिक संपदा सुरक्षा और प्रबंध सेवाएं मुहैया कराना तथा प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण और व्यापारीकरण संभव करना।

•   भारत में विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान  (आईआईटी), स्वायत्त संस्थान और शिक्षा संस्थानों में तकनीकी जानकारी के विकास और उद्यमियों तथा उद्योग को इसके प्रभावी हस्तांतरण के लिए उद्योग-शिक्षा संस्थान भागीदारिता का विकास करना तथा इसे मजबूत बनाना। 


एनआरडीसी – आईएफसी आउटरीच सेंटर

 एनआरडीसी – एम्स नवाचार सरलीकरण केंद्र

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान

अंसारी नगर,

नई दिल्ली – 110029


एनआरडीसी – एयूयूपी नवाचार सरलीकरण केंद्र

एमिटी यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश

सेक्टर -125, नोएडा,

गौतम बुद्ध नगर - 201303

उत्तर प्रदेश

परिकल्पना एवं लक्ष्य


भारत में एक अग्रणी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण संगठन बनना।


मूल्यवर्धन और साझेदारी के द्वारा अनुसंधान और विकास संस्थाओं की नवाचारी, विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना, विकास करना, पोषण और उनका व्यापारीकरण करना।

अनुसंधान और विकास संस्थाओं तथा उद्योगों को उन प्रौद्योगिकियों के प्रति संवेदनशील बनाना जिन्हें विकसित करने और व्यापारीकृत करनें की आवश्यकता है।

हमारा निदेशक मंडल


डॉ0 एच. पुरुषोत्तम
डॉ0 एच. पुरुषोत्तम
अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक
नेशनल रिसर्च डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन
20-22, जमरूदपुर कम्युनिटी सेंटर, कैलाश कॉलोनी एक्सटेंशन
नई दिल्ली-110048 
+91 11 29241212
संपर्क : +91 11 29241212
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श्री अश्वनी गुप्ता

 श्री अश्वनी गुप्ता
वैज्ञानिक ‘जी’, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग
प्रौद्योगिकी भवन, न्यू मेहरौली रोड
नई दिल्ली – 110016
संपर्क :+91 11 26964029
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श्री संजय भाटिया

श्री संजय भाटिया
प्रबंध निदेशक
हिन्दुस्तान टिन वर्क्स लिमिटेड
426, डीएलएफ टावर – ए, जसोला
नई दिल्ली
संपर्क : +91 11 49998888, 49998811
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हमारे मंत्री




डॉ. हर्षवर्धन
माननीय केंद्रीय मंत्री 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा भू विज्ञान


श्री वाई एस चौधरी
माननीय राज्य मंत्री

विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा भू विज्ञान